Th12/सानाए के अंत

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१३ फरवरी, २०१७ को ख़त्म हुआ।

अच्छा अंत ५ (सानाए-क)

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#0@0पर्वत के चोटी पर स्थित मोरिया देवालय।

#0@1तलहटी पर चेरी ब्लॉसम खिल रहे थे पर चोटी अब भी बर्फ़ से ढकी थी।

#0@2बर्फ़ न होने से भी काम ही इंसान यहाँ आया करते थे।

Kanako 

#0@3"लगता है काम मुश्किल था।

  

#0@4योकाई विनाश आसान नहीं।"

Sanae 

#0@5"सो तो है।

  

#0@6"मैं एक जहाज़ का पीछा कर रही थी कि अचानक मैं एक ऐसी विश्व में पहुँची जहाँ से भागना संभव नहीं था।

Sanae 

#0@7तब मैंने एक इंसान से से सहायता माँगी और वापस आई।"

Kanako 

#0@8"अच्छा....

  

#0@9तो ये उस सहायता के बदले में है?"

Kanako 

#0@10" म्योरेन मंदिर के निर्माण में सहायता करें। हमें कामगार चाहिए।"

Sanae 

#0@11"वैसे हाँ, उसे कहा कि वो एक मंदिर बनाना चाहती है तो मैंने सोचा कि उसकी सहायता करना अच्छा होगा।

  

#0@12देखिए, उसे आपके और सुवाको जी के कौशल वाले लोग चाहिए।"

Kanako 

#0@13"लेकिन जहाज़ के एक सैर के बदले ये बहुत ज़्यादा है।"

Sanae 

#0@14"पर मेरे पास घर जाने का रास्ता नहीं था।"

Kanako 

#0@15"ख़ैर छोड़ो। तो उसका नाम क्या था?"

Sanae 

#0@16"ब्याकुरेन। ब्याकुरेन हिजिरी।"

Kanako 

#0@17"कितना संदेहजनक है।"

Kanako 

#0@18"तुमने कहा कि वो कई वर्षों तक धरती के नीचे क़ैद थी, लेकिन निकालकर सबसे वो एक मंदिर बनाना चाहती है?

Sanae 

#0@19"हाँ, वो भी सही है।

  

#0@20मैं माकाई से घर आने के बारे में चिंतित थी, इसलिए भूल गई।"

Kanako 

#0@21"कोई बात नहीं, तो उसकी सहायता क्यों नहीं करते?

  

#0@22इससे हम इस ब्याकुरेन को परख लेंगे।"

Sanae 

#0@23"आह, धन्यवाद।"

Kanako 

#0@24"तुम भी सहायता करने वाली हो।"

Sanae 

#0@25"आह, पर मैं शारीरिक श्रम में अछि नहीं हूँ...."

#0@26और इस तरह कानाको और सुवाको ने म्योरेन मंदिर का निर्माण किया।

#0@27इसे चुटकी में ख़त्म कर दिया गया। सुवाको ने ज़मीन को समतल कर दिया, जहाज़ को नीचे ले आई और मंदिर तैयार था।

#0@28कानको ने ब्याकुरेन और उसके योकाइयों को ध्यान से देखा।

#0@29योकाई ब्याकुरेन की इज़्ज़त करते थे।

#0@30कनाको को यह अजीब लगा कि योकाई एक भिक्षु की इतनी इज़्ज़त करते थे जिसने एक मंदिर बनाया हो।

#0@31ब्याकुरेन हमेशा इंसानों और योकाइयों के साथ स्पष्टता और सच्चाई से पेश आती थी।

#0@32फिर वह संदेह से भरे कानाको की ओर मुड़ी और उसका दिल से धन्यवाद किया।

#0@33"तुम पर्वत की देवी हो न? मैं देखते ही पहचान गई।"

#0@34यह कहकर वह अपनी परिस्थिति समझाने लगी।

#0@35वह कहाँ जन्मी थी,

#0@36उसने कैसा जीवन बिताया,

#0@37और उसे क्यों क़ैद कर दिया गया था।

#0@38कानाको को उसकी कहानी में कहीं झूठ का अंदेशा नहीं हुआ।

#0@39"ये भिक्षु कोई आम इंसान को नहीं है।"

#0@40अब कानाको को यक़ीन हो गया कि उन्हें और सावधानी बरतनी होगी।

#0@41

#0@41अंत ५ - ब्याकुरेन सचमुच एक बहुत अच्छी व्यक्ति है।

#0@42ऑल क्लियर करने पर बधाई हो! जैसा मैंने सोचा था!

अच्छा अंत ६ (सानाए-ख)



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#0@0पवित्र पालकी जहाज़, जो आकाश में उड़ता है।

#0@1वह एक ख़ज़ाने का जहाज़ नहीं था, बस एक आम जहाज़ जो आसमान में उड़ सकता था।

#0@2इस तरह आकाश में उड़ना ज़रूर मज़ेदार होगा।

Suwako 

#0@3"वाह, ये उड़ता जहाज़ तो बढ़िया है।"

Byakuren 

#0@4"तुम्हें आश्चर्यचकित करना कठिन है न?"

Suwako 

#0@5"वैसे, आजकल उड़न तश्तरी कौन सी नई बात है?"

Byakuren 

#0@6"उड़न तश्तरी?"

Suwako 

#0@7"ऐसे वस्तुओं तो उड़न तश्तरी कहते हैं।

  

#0@8कम से कम, जहाँ से हम आए हैं।"

Byakuren 

#0@9"तो ऐसा है।"

Suwako 

#0@10"उन्हें अज्ञात उड़ते वस्तु भी कहते हैं।"

Suwako 

#0@11"तो मुझे पता है कि ये जहाज़ क्या है, पर ये नन्हे उड़न तश्तरी?"

Byakuren 

#0@12"नन्हे उड़न तश्तरी, अर्थात् ये अज्ञात उड़ते वस्तु?

  

#0@13क्या तुम उड़ते भंडार के टुकड़ों के बारे में बात कर रही हो?"

Sanae 

#0@14"मुझे एक मिल गया!"

Suwako 

#0@15"लाजवाब। देखो, वो वस्तु।

  

#0@16वो देखने में तो भंडार का अंश तो नहीं लग रहा।"

Byakuren 

#0@17"सचमुच?

  

#0@18वो टूट गई है पर वो सच में एक लकड़ी के गोदाम का अंश था।"

Suwako 

#0@19"क्या? लकड़ी का? ये वस्तु?"

Sanae 

#0@20"छूने में तो ये लकड़ी का लगता है...."

Suwako 

#0@21"एक गोलाकार गोदाम? ये अपने समय से बहुत आगे था।"

Byakuren 

#0@22"क्या? गोलाकार?

  

#0@23नहीं, वो बस एक साधारण गोदाम था। क्या वो समय से पीछे है?"

Sanae 

#0@24"क्या?!"

Suwako 

#0@24"क्या?!"

Byakuren 

#0@25"क्या? मैंने कुछ अजीब कह दिया?"

#0@26वे तीनों कुछ समय के लिए आपस में बात करते रहे।

#0@27सुवाको को लगा कि सानाए के दिए रिपोर्ट में एक रहस्य था और उसने स्वयं उड़ते जहाज़ की सवारी करने का निर्णय लिया।

#0@28वह रहस्य था ये उड़ते गोलाकार उड़न तश्तरी।

#0@29उसे विश्वास नहीं हुआ ये एक गोदाम के हिस्से थे।

#0@30सुवाको को लगा कि ब्याकुरेन और उसके योकाई अब भी कुछ छिपा रही है।

#0@31पर वह ग़लत थी।

#0@32सच्चाई यह थी ये उड़ते लकड़ी के टुकड़े ब्याकुरेन और उसके योकाइयों को उड़न तश्तरी जैसे नहीं दिखते थे।

#0@33जो उड़न तश्तरी सानाए ने पकड़ा था वह एक आम लकड़ी जैसा दिखता था।

#0@34इसलिए उनकी बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी।

#0@35सानाए और सुवाको को यह समझ नहीं आया और वे असंतुष्ट होकर जहाज़ से उत्तर गए।

#0@36उन्होंने यही मान लिया कि ब्याकुरेन के ज़माने में गोदाम गोल हुआ करते थे।

#0@37अंत ६ - उड़न तश्तरियों के पीछे किसका हाथ है?

#0@38ऑल क्लियर करने पर बधाई हो! जैसा मैंने सोचा था!

बुरा अंत ११ (सानाए-क)



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#0@0माकाई का हिस्सा, होक्काई।

#0@1सानाए को ब्याकुरेन ने पकड़ लिया और वह वापस घर नहीं लौट पाई।

#0@2उसके पास ब्याकुरेन का भाषण सुनने के अलावा और कोई चारा नहीं था....

Sanae 

#0@3"अच्छा, तो मानती हूँ कि सभी योकाई बुरे नहीं हैं।

  

#0@4पर मैं उन्हें देवताओं के समान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ।"

#0@5सानाए चुपचाप ब्याकुरेन के वचन सुनती रही।

#0@6पहले वह सिर्फ़ चाहती थी कि ब्याकुरेन उसे घर भेज दे, पर समय के साथ वह योकाइयों के साथ सहानुभूति होने लगी।

#0@7अंत ११ - तो, मैं घर नाब जा सकती हूँ?

#0@8एक क्रेडिट क्लियर करने की कोशिश कीजिए!

बुरा अंत १२ (सानाए-ख)



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#0@0माकाई का हिस्सा, होक्काई।

#0@1सानाए को ब्याकुरेन ने पकड़ लिया और वह वापस घर नहीं लौट पाई।

#0@2उसके पास ब्याकुरेन पर अपनी भावनाएँ उड़ेलने ले अलावा कोई चारा नहीं था।

Sanae 

#0@3"बात ये है कि इंसान हर समय योकाइयों के डर में रहते हैं।

  

#0@4तो हम तुम्हारे जैसे किसी व्यक्ति को ख़ुला घूमने नहीं दे सकते।

  

#0@5वैसे, मैं अपने विश्व में वापस कैसे जा सकती हूँ?"

#0@6सानाए को एहसास हुआ कि वह योकाइयों से घिरी हुई थी।

#0@7और वह तब समझी उन सबका विरोध करने से उसकी जान भी जा सकती है।

#0@8अंत १२ - ज़िद्दी होना अच्छी बात नहीं।

#0@9एक क्रेडिट क्लियर करने की कोशिश कीजिए!